तेरे बिन




शामें गम अब और कटती नहीं है तेरे बिन |
बज़्म में विरानियाँ लगने लगी है तेरे बिन |
तन्हाइयों में भी अक्सर तेरा साथ है रहता |
ख्यालों में हरपल हलचल रहती है तेरे बिन |


मिलो फुर्सत से कि हम उदास हैं तेरे बिन |
नहीं कटती अब ये तन्हां सी रात तेरे बिन |
तेरे अहसास में अब पहली सी बात न रही |
जीवन जीना मुहाल फिर हुआ है तेरे बिन |

वक्त कि है साजिश हम तन्हां हैं तेरे बिन |
रिमझिम बारिश में भीगे अकेले तेरे बिन |
गुजरते हरपल में तेरी यादों का साथ लेकर |
राहे वफ़ा में कारवां संग चलते रहे तेरे बिन |

सोचा फिर से एक अहसास जगाएं तेरे बिन |
ख्वाइशें हो बेशुमार हम तन्हां जिए तेरे बिन |
हर उठती आरजू में सिर्फ तू ही तू शरीक हो |
बंद आँखों में सपने न सजा सके तेरे बिन |

19 टिप्‍पणियां:

पत्रकार-अख्तर खान "अकेला" ने कहा…

bhtrin gzl bhtrin jzbaat bhtrin alfaaz badhaai ho .akhtar khan akela kota rajsthan

Rakesh Kumar ने कहा…

तेरे बिन...तेरे बिन...तेरे बिन...

आपकी प्रस्तुति लाजबाब है मीनाक्षी जी.

पर मेरे ब्लॉग से आप ने क्यूँ मुँह मोड़ा है जी.

मेरा ब्लॉग बहुत उदास है तेरे बिन.

vidya ने कहा…

बहुत बहुत बढ़िया....
सादर..

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सुंदर रचना ...

संध्या शर्मा ने कहा…

सोचा फिर से एक अहसास जगाएं तेरे बिन |
ख्वाइशें हो बेशुमार हम तन्हां जिए तेरे बिन...
तेरे बिन... इतनी सुन्दर रचना जवाब नहीं मीनाक्षी जी...

sushma 'आहुति' ने कहा…

कोमल भावो की और मर्मस्पर्शी.. अभिवयक्ति .......

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रेम फुहार में नहाती सी कविता..

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

आज 26/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (सुनीता शानू जी की प्रस्तुति में) लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

Swati Vallabha Raj ने कहा…

tere bin...sundar abhivyakti.....

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

खुबसूरत एहसासात...
सादर बधाई.

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

सोचा फिर से एक अहसास जगाएं तेरे बिन |
ख्वाइशें हो बेशुमार हम तन्हां जिए तेरे बिन |
हर उठती आरजू में सिर्फ तू ही तू शरीक हो |
बंद आँखों में सपने न सजा सके तेरे बिन |

WAH KYA KHOOB LIKHA HAI APNE ...BADHAI MEENAXI JI.

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

सोचा फिर से एक अहसास जगाएं तेरे बिन |
ख्वाइशें हो बेशुमार हम तन्हां जिए तेरे बिन |
हर उठती आरजू में सिर्फ तू ही तू शरीक हो |
बंद आँखों में सपने न सजा सके तेरे बिन |

WAH KYA KHOOB LIKHA HAI APNE ...BADHAI MEENAXI JI.

कुश्वंश ने कहा…

लाजबाब प्रस्तुति

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति
आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 27-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

अरूण साथी ने कहा…

sundar

sangita ने कहा…

आपकी प्रस्तुति लाजबाब है मीनाक्षी जी.सादर..

Sadhana Vaid ने कहा…

बहुत भीगी-भीगी सी रचना मीनाक्षी जी ! अति सुन्दर !

Minakshi Pant ने कहा…

मेरे सभी मित्रों का मैं हार्दिक आभार प्रकट करती हूँ आप सभी का बहुत - बहुत शुक्रिया |

K.R.Baraskar ने कहा…

शामें गम अब और कटती नहीं है तेरे बिन |